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वाल्मीकि रामायण 75.11

इमे द्वे धनुषी श्रेष्ठे दिव्ये लोक अभिपूजिते ।
दृढे बलवती मुख्ये सुकृते विश्वकर्मणा ॥१-७५-११॥

पूरा अध्याय