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वाल्मीकि रामायण 74.20

तम् दृष्ट्वा भीम संकाशम् ज्वलंतम् इव पावकम् ।
वसिष्ठ प्रमुखा विप्रा जप होम परायणाः ॥१-७४-२०॥

पूरा अध्याय