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वाल्मीकि रामायण 73.4

स्वस्रीयम् मम राजेन्द्र द्रष्टु कामो महीपतिः ।
तत् अर्थम् उपयातो अहम् अयोध्याम् रघुनंदन ॥१-७३-४॥

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