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वाल्मीकि रामायण 73.31

प्रतीच्छ पाणिम् गृह्णीष्व मा भूत् कालस्य पर्ययः ।
तम् एवम् उक्त्वा जनको भरतम् च अभ्यभाषत ॥१-७३-३१॥

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