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वाल्मीकि रामायण 73.27

प्रतीच्छ च एनाम् भद्रम् ते पाणिम् गृह्णीष्व पाणिना ।
पतिव्रता महभागा छाय इव अनुगता सदा ॥१-७३-२७॥

पूरा अध्याय