ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 7373.15वाल्मीकि रामायण 73.15कृत कौतुक सर्वस्वा वेदि मूलम् उपागताः । मम कन्या मुनिश्रेष्ठ दीप्ता वह्नेः इव अर्चिषः ॥१-७३-१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय