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वाल्मीकि रामायण 68.7

पूर्वम् प्रतिज्ञा विदिता वीर्य शुल्का मम आत्मजा ।
राजानः च कृत अमर्षा निर्वीर्या विमुखी कृताः ॥१-६८-७॥

पूरा अध्याय