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वाल्मीकि रामायण 66.21

अरुन्धन् मिथिलाम् सर्वे वीर्य संदेहम् आगताः ।
आत्मानम् अवधूतम् ते विज्ञाय मुनिपुंगव ॥१-६६-२१॥

पूरा अध्याय