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वाल्मीकि रामायण 66.10

यस्मात् भाग अर्थिनो भागान् न अकल्पयत मे सुराः ।
वर अंगानि महाअर्हाणि धनुषा शातयामि वः ॥१-६६-१०॥

पूरा अध्याय