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वाल्मीकि रामायण 65.9

त्रै लोक्यम् येन संभ्रांतम् आतापितम् इव अभवत् ।
ततो देवर्षि गन्धर्वाः पन्नग उरग राक्षसाः ॥१-६५-९॥

पूरा अध्याय