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वाल्मीकि रामायण 65.39

एवम् उक्त्वा मुनि श्रेष्ठम् वैदेहो मिथिला अधिपः ।
प्रदक्षिणम् चकार आशु स उपाध्यायः स बांधवः ॥१-६५-३९॥

पूरा अध्याय