ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 6565.37वाल्मीकि रामायण 65.37श्वः प्रभाते महातेजो द्रष्टुम् अर्हसि माम् पुनः । स्वागतम् जपताम् श्रेष्ठ माम् अनुज्ञातुम् अर्हसि ॥१-६५-३७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय