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वाल्मीकि रामायण 64.9

कोकिलस्य तु शुश्राव वल्गु व्याहरतः स्वनम् ।
संप्रहृष्टेन मनसा स एनाम् अन्वैक्षत ॥१-६४-९॥

पूरा अध्याय