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वाल्मीकि रामायण 64.12

यत् माम् लोभयसे रंभे काम क्रोध जय एषिणम् ।
दश वर्ष सहस्राणि शैली स्थास्यसि दुर्भगे ॥१-६४-१२॥

पूरा अध्याय