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वाल्मीकि रामायण 63.24

शिशिरे सलिले शायी रात्रि अहानि तपो धनः ।
एवम् वर्ष सहस्रम् हि तपो घोरम् उपागमत् ॥१-६३-२४॥

पूरा अध्याय