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वाल्मीकि रामायण 63.14

उत्तरम् पर्वतम् राम विश्वामित्रो जगाम ह ।
स कृत्वा नैष्ठिकीम् बुद्धिम् जेतु कामो महायशाः ॥१-६३-१४॥

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