ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 6363.10वाल्मीकि रामायण 63.10स व्रीड इव संवृत्तः चिन्ता शोक परायणः । बुद्धिर् मुनेः समुत्पन्ना स अमर्षा रघुनंदन ॥१-६३-१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय