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वाल्मीकि रामायण 62.5

त्रातुम् अर्हसि माम् सौम्य धर्मेण मुनिपुंगव ।
त्राता त्वम् हि नरश्रेष्ठ सर्वेषाम् त्वम् हि भावनः ॥१-६२-५॥

पूरा अध्याय