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वाल्मीकि रामायण 62.27

स च राजा नरश्रेष्ठ यज्ञस्य च समाप्तवान् ।
फलम् बहु गुणम् राम सहस्राक्ष प्रसादजम् ॥१-६२-२७॥

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