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वाल्मीकि रामायण 62.25

स बद्धो वाग्भिः अग्र्याभिः अभितुष्टाव वै सुरौ ।
इन्द्रम् इन्द्र अनुजम् चैव यथावत् मुनि पुत्रकः ॥१-६२-२५॥

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