ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 6262.17वाल्मीकि रामायण 62.17श्व मांस भोजिनः सर्वे वासिष्ठा इव जातिषु । पूर्णम् वर्ष सहस्रम् तु पृथिव्याम् अनुवत्स्यथ ॥१-६२-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय