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वाल्मीकि रामायण 6.5

तेन सत्याभिसंधेन त्रिवर्गम् अनुष्टिता ।
पालिता सा पुरी श्रेष्टा इन्द्रेण इव अमरावती ॥१-६-५॥

पूरा अध्याय