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वाल्मीकि रामायण 59.14

कथम् सदसि भोक्तारो हविः तस्य सुर ऋषयः ।
ब्राह्मणा वा महात्मानो भुक्त्वा चण्डाल भोजनम् ॥१-५९-१४॥

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