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वाल्मीकि रामायण 58.4

हविष्पन्दो मधुष्यन्दो दृढनेत्रो महारथः ।
पूर्णे वर्ष सहस्रे तु ब्रह्मा लोक पितामहः ॥१-५७-४॥

पूरा अध्याय