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वाल्मीकि रामायण 57.15

इदम् जगाद भद्रम् ते राजानम् घोर दर्शनम् ।
किम् आगमन कार्यम् ते राजपुत्र महाबल ॥१-५८-१५॥

पूरा अध्याय