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वाल्मीकि रामायण 57.13

दह्यमानो दिवा रात्रम् विश्वामित्रम् तपो धनम् ।
विश्वामित्रः तु तम् दृष्ट्वा राजानम् विफली कृतम् ॥१-५८-१३॥

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