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वाल्मीकि रामायण 57.10

अथ रात्र्याम् व्यतीतायाम् राजा चण्डालताम् गतः ।
नील वस्त्र धरो नीलः परुषो ध्वस्त मूर्धजः ॥१-५८-१०॥

पूरा अध्याय