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वाल्मीकि रामायण 56.4

क्व च ते क्षत्रिय बलम् क्व च ब्रह्म बलम् महत् ।
पश्य ब्रह्म बलम् दिव्यम् मम क्षत्रिय पांसन ॥१-५६-४॥

पूरा अध्याय