ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 5555.9वाल्मीकि रामायण 55.9समुद्र इव निर्वेगो भग्न दंष्ट्र इव उरगः । उपरक्त इव आदित्यः सद्यो निष्प्रभताम् गतः ॥१-५५-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय