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वाल्मीकि रामायण 55.25

वदतो वै वसिष्ठस्य मा भै इति मुहुर्मुहुः ।
नाशयामि अद्य गाधेयम् नीहारम् इव भास्करः ॥१-५५-२५॥

पूरा अध्याय