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वाल्मीकि रामायण 55.20

विवर्धमानो वीर्येण समुद्र इव पर्वणि ।
हतम् मेने तदा राम वसिष्ठम् ऋषि सत्तमम् ॥१-५५-२०॥

पूरा अध्याय