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वाल्मीकि रामायण 55.12

स गत्वा हिमवत् पार्श्वम् किंनर उरग सेवितम् ।
महादेव प्रसाद अर्थम् तपः तेपे महातपाः ॥१-५५-१२॥

पूरा अध्याय