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वाल्मीकि रामायण 54.8

भगवन् किम् परित्यक्ता त्वया अहम् ब्रह्मणः सुत ।
यस्मात् राज भटा माम् हि नयन्ते त्वत् सकाशतः ॥१-५४-८॥

पूरा अध्याय