ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 5454.6वाल्मीकि रामायण 54.6निर्धूय ताम् तदा भृत्यान् शतशः शत्रुसूदन । जगाम अनिल वेगेन पाद मूलम् महात्मनः ॥१-५४-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय