ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 5454.3वाल्मीकि रामायण 54.3परित्यक्ता वसिष्ठेन किम् अहम् सुमहात्मना । या अहम् राज भृतैः दीना ह्रियेयम् भृश दुःखिता ॥१-५४-३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय