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वाल्मीकि रामायण 53.8

पूजितो अहम् त्वया ब्रह्मन् पूज अर्हेण सुसत्कृतः ।
श्रूयताम् अभिधास्यामि वाक्यम् वाक्य विशारद ॥१-५३-८॥

पूरा अध्याय