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वाल्मीकि रामायण 53.5

सर्वम् आसीत् सुसंतुष्टम् हृष्ट पुष्ट जन आयुतम् ।
विश्वामित्र बलम् राम वसिष्ठेन सुतर्पितम् ॥१-५३-५॥

पूरा अध्याय