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वाल्मीकि रामायण 53.20

नाना वर्ण विभक्तानाम् वयःस्थानाम् तथैव च ।
ददामि एकाम् गवाम् कोटिम् शबला दीयताम् मम ॥१-५३-२०॥

पूरा अध्याय