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वाल्मीकि रामायण 51.25

ब्रह्म ऋषि गण संकीर्णम् देव ऋषि गण सेवितम् ।
तपः चरण संसिद्धैः अग्नि कल्पैः महात्मभिः ॥१-५१-२५॥

पूरा अध्याय