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वाल्मीकि रामायण 51.14

अचिन्त्य कर्मा तपसा ब्रह्मर्षिः अमित प्रभः ।
विश्वामित्रो महातेजा - वेद्म्य - वेत्सि एनम् परमाम् गतिम् ॥१-५१-१४॥

पूरा अध्याय