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वाल्मीकि रामायण 50.21

परस्परस्य सदृशौ प्रमाण इन्गित चेष्टितैः ।
काक पक्ष धरौ वीरौ श्रोतुम् इच्छामि तत्त्वतः ॥१-५०-२१॥

पूरा अध्याय