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वाल्मीकि रामायण 5.8

राज मार्गेण महता सुविभक्तेन शोभिता ।
मुक्ता पुष्प अवकीर्णेन जल सिक्तेन नित्यशः ॥१-५-८॥

पूरा अध्याय