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वाल्मीकि रामायण 5.10

कपाट तोरणवर्ती सु विभक्त अन्तरापणाम् ।
सर्व यंत्र अयुधवतीम् उषिताम् सर्व शिल्पिभिः ॥१-५-१०॥

पूरा अध्याय