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वाल्मीकि रामायण 49.18

स्मरंती गौतम वचः प्रतिजग्राह सा च तौ।
पाद्यम् अर्घ्यम् तथा आतिथ्यम् चकार सुसमाहिता ।प्रतिजग्राह काकुत्स्थो विधि दृष्टेन कर्मणा ॥१-४९-१८॥

पूरा अध्याय