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वाल्मीकि रामायण 48.5

भूषयन्तौ इमम् देशम् चन्द्र सूर्यौ इव अंबरम् ।
परस्परेण सदृशौ प्रमाण इन्गित चेष्टितैः ॥१-४८-५॥

पूरा अध्याय