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वाल्मीकि रामायण 48.3

पद्म पत्र विशालाक्षौ खड्ग तूणी धनुर् धरौ ।
अश्विनौ इव रूपेण समुपस्थित यौवनौ ॥१-४८-३॥

पूरा अध्याय