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वाल्मीकि रामायण 48.12

मिथिल उपवने तत्र आश्रमम् दृश्य राघवः ।
पुराणम् निर्जनम् रम्यम् पप्रच्छ मुनि पुंगवम् ॥१-४८-१२॥

पूरा अध्याय