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वाल्मीकि रामायण 47.4

वात स्कंधा इमे सप्त चरन्तु दिवि पुत्रक ।
मारुता इति विख्याता दिव्यरूपा मम आत्मजाः ॥१-४७-४॥

पूरा अध्याय