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वाल्मीकि रामायण 47.19

इह अद्य रजनीम् एकाम् सुखम् स्वप्स्यामहे वयम् ।
श्वः प्रभाते नरश्रेष्ठ जनकम् द्रष्टुम् अर्हसि ॥१-४७-१९॥

पूरा अध्याय