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वाल्मीकि रामायण 46.12

पूर्णे वर्ष सहस्रे दश ऊने रघुनंदन ।
दितिः परम संहृष्टा सहस्राक्षम् अथ अब्रवीत् ॥१-४६-१२॥

पूरा अध्याय